पृष्ठ:कार्ल मार्क्स, फ्रेडरिक एंगेल्स.djvu/३८

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से राजनीतिक दृष्टि से भी प्रधान वर्ग बन जाता है। और इस प्रकार पीड़ित वर्ग को दबाने और उसका शोषण करने के लिए उसे नये साधन मिल जाते हैं। इस प्रकार प्राचीन राज्य गुलामों के मालिकों का राज्य था जिससे गुलामों को दबाया जा सके जैसे कि सामन्ती राज्य कम्मियों और भूदासों को दबाने के लिए अभिजात वर्ग का अस्त्र था, और जैसे कि वर्तमान प्रतिनिधिपूर्ण राज्य पूंजी द्वारा मजदूरों के शोषण का अस्त्र है।" ( एंगेल्स , परिवार, निजी संपत्ति तथा राज्यसत्ता की उत्पत्ति', जिसमें लेखक ने अपने और मार्क्स के विचारों की व्याख्या की है।) यही स्थिति जनवादी जनतंत्र में भी, सबसे स्वाधीन और प्रगतिशील पूंजीवादी राज्य में भी है। अन्तर केवल रूप का होता है ( सरकार का संबंध स्टॉक एक्सचेंज से हो जाता है और अधिकारी वर्ग तथा प्रेस को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से घूस दे दी जाती है इत्यादि )। समाजवाद वर्गों का अंत करते हुए, इसी साधन से, राज्य का भी अन्त कर देगा। ‘ड्यूहरिंग मत- खण्डन' में एंगेल्स ने लिखा है- “राज्य का यह पहला काम , जब वह वास्तव में पूर्ण समाज का प्रतिनिधि बनकर आता है और समाज के नाम पर उत्पादन के साधनों पर अधिकार कर लेता है, राज्य के नाते उसका अन्तिम स्वाधीन कार्य भी होता है। एक क्षेत्र के बाद दूसरे में राज्य का सामाजिक संबंधों में हस्तक्षेप व्यर्थ हो जाता है और उसके बाद अपने आप बंद हो जाता है। लोगों के शासन के स्थान पर वस्तुओं का नियंत्रण और उत्पादन-क्रमों का निर्देश आ जाता है। राज्यसत्ता का 'अन्त नहीं किया जाता' वह स्वयं क्रमशः नष्ट हो जाती है।" "उत्पादकों के स्वतंत्र और समान सहयोग के आधार पर जिस समाज को उत्पादन का पुनर्संगठन करना है वह समाज राज्यसत्ता की सारी मशीनरी को पुरानी चीज़ों के अजायब घर में, चर्खे और पीतल की कुल्हाड़ी के साथ रख देगा। और यही उसके लिए उचित स्थान भी होगा।" (एंगेल्स : 'परिवार, निजी संपत्ति तथा राज्यसत्ता की उत्पत्ति')

अन्त में छोटे किसानों के संबंध में, जो अपहरण करनेवालों के अपहरण किये जाने के समय बने रहेंगे, मार्क्सीय समाजवाद का दृष्टिकोण एंगेल्स के एक कथन से प्रकट होता है जो मार्क्स के मत को

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