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अत्यंत सुसज्जित एवं सुसम्पादित है। लेखक ने समाज के चरित्रों का जीता-जागता खाका सामने ला रखा है। पढ़ते जाइये और सामाजिक चरित्रों पर विचार कर देखिये कि सचमुच भारतवर्ष में यह यथार्थ घटता है कि नहीं। हम शर्तिया कह सकते हैं कि ऐसा कारुणिक मौलिक उपन्यास हिन्दी मे शायद ही कोई हो। पढ़कर आप अनायास वाहवा कह उठेंगे। इसका करुण रसात्मक वर्णन पढ़कर आँसू बहने लगते है। सरल मुहावरेदार भाषा और साहित्यिक वर्णन-छटा! सजिल्द, मूल्य २॥)


 

नवयुवक-हृदय-हार
१—प्रेम
लेखक—आचार्य अश्विनीकुमार दत्त

प्रेम क्या है? आज कल स्कूल और कालेज में, शहर और बाजार में, जो 'प्रेम' हम देखते है, प्रेम क्या वही है? नहीं, कदापि नहीं। वह प्रेम नहीं, मोह है, तृष्णा और वासना है—मृग-मरीचिका है। तो फिर प्रेम है क्या? इसकी विस्तृत व्याख्या देखनी हो, तो इसे पढ़िये। अश्विनी बाबू की सचित्र जीवनी सहित। पृष्ठ १००, द्वितीय सुसम्पादित संस्करण, मूल्य ।״)

२—जयमाल

लेखक—श्रीयुत शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय

उपन्यास लिखने में शरत् बाबू अपना जोड़ नहीं रखते। एशिया के महान लेखकों में आपकी गिनती होती है। उन्हीं की 'परिणीता' नामक एक प्रेम-कहानी का यह सुन्दर अनुवाद है।

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