पृष्ठ:कांग्रेस-चरितावली.djvu/७८

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कांग्रेम-चरितावली। - - ने आपको बहुत जल्द पोग्लाई का मुनिक यना दिया। एक माल ही में आप यहां मर्व प्रिय हो गए। यहां तक कि भय चापका बहां से तयादिसा हुना तय वहां के लोगों ने नापको फिर वापस माने के लिए मन्दिरों और देवालयों में ईयर से प्रार्थना की। जय शंकरन् मदरास यापस पाए तय फिर अपनी वकालत करने लगे। यकालत से भाप को अच्छी बामदनी होने लगी। लोगों ने श्रापके देवालय फमेटी का समामद बनाया । इस कमेटी के ममापति मिस्टर सालिवन ये और मर टी० मत्यू स्वामी नाम्पर महाशय भी इसने सभासद थे। मत्यू स्वामी शंकरन की बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता को भली भांति जानते थे। प्रतएव प्राप से उन्होंने यहुत अच्छा काम लिया। इम से यह यात माफ जाहिर होती है कि शंकरन् एक प्रतिभाशाली पुरुप हैं । इसका प्रमाण उनके कार्यों से बहुत ही अच्छा मिलता है । यह बात और भी यहुत से उदाहरण देकर सायित की जा सकती है। सर पाएर्सटर्नर महोदय जो उस समय मदरास हाईकोर्ट के जज थे, इस बात पर वापसे अधिक प्रसन्न थे, कि मिस्टर शंकरन के विचारों में गड़बड़ नहीं होती। जिस पक्ष की ओर से प्राप वकालत करने खड़े होते हैं उसके पर फा समर्थन ऐसी उत्तम रीति से जज के सामने करते हैं कि, जिस से मुकद्दमें का स्वरूप बहुत ही सरल और सहज रीति से समझने में प्राजाता है। इस क्रिया के साधन की युक्ति प्राप पूर्ण रूप से जानते हैं। इसी कारण वकालत के व्यवसाय में आप को इतनो सफलता हुई। मत्यू स्वामी यहुधा कहा करते थे कि शंकरन् की अपेक्षा कुछ वकीलों को कानून का ज्ञान अच्छा है, परन्तु दूरदर्शिता, चतुराई, कानून का सुप्रयोग इन बातों में शंकरन का मुकाबिला करने वाला वकील मदरास में नहीं है। न्यायशास्त्र के तत्वों को किस प्रकार और कहां उपयोग में लाना चाहिए इस यात का शंकरन् को इतना अधिक जान है कि सर चार्ल्स ने श्राप को 'तत्वज्ञ न्यायवेत्ता' की पदवी दे रक्खी है। सन् १८८४ एक ज़मीन सम्बन्धी कमीशन बैठा था। उसमें सर टो० माधवराव सभा- पति थे। उस कमीशन के शंकरन् भी सभासद बनाए गए शंकरन् महो- कभी में