पृष्ठ:कांग्रेस-चरितावली.djvu/१२८

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११० कांग्रेस-चरितावली। यही कहेंगे कि गवमेंट का प्रजा से मिलकर कार्य करने की इतिश्री हो, चुकी । आज सौ वर्ष से अंगरेज़ी गवर्मेंट भारत पर शासन करती है परन्तु ... इस से बढ़कर राजनीति का अपमान कभी देखने में न आया था।" इसी प्रकार मापने स्वदेशी, वहिष्कार इत्यादि अनेक देश हित की बातों की विवेचना बड़ी योग्यता से की। आपके भापण को सुनकर सब लोग बड़े प्रसन्न हुए । परन्तु विलायत में बहुत दिनों तक निरन्तर व्याख्यान देते रहने से आपके गले में, एक फोड़ा हो गया था। यद्यपि वह फोटा उस समय बिलकुल अच्छा हो गया था परन्तु उसका कुछ असर वाकी था। इस कारण जो लोग पंडाल में दूर बैठे थे वे आपका भापण अच्छी तरह सुन न सके । अब भी आप सारा समय देश हित का कार्य करने में, व्यतीत करते हैं । गत वर्ष सयुंक्त प्रान्त के कई एक बड़े बड़े नगरों में भी आपने आकर व्याख्यान दिए और लोगों को भली भांति समझा दिया कि हमारे राजनैतिक अधिकार क्या हैं। लाला लाजपत राय को जय गवर्मेंट ने बिना कारण और बिना उनके अपराधों की जांच किए मंडाले भेज दिया तब आपने लाला लाजपत राय का पक्ष समर्थन करने के लिए एक पत्र बम्बई के प्रसिद्ध अंगरेजी समाचार पत्र 'टाइम्स आफ इंडिया' में, प्रकाशित करवाया था। उसमें आपने स्पष्ट लिखा था किः-"वर्तमान दशा पर मैंने खूब अच्छी तरह विचार किया है। मुझे इस बात का दृढ़ विश्वास हो गया है कि लाला लाजपत राय की स्वतंत्रता छीन कर बिना विचार किए हुए ही, उन्हें देश निकाले का कठिन दंड देकर, गवमैंट ने बड़ा अन्याय किया है।" राजविद्रोही सभानों को बन्द करने का बिल नवम्बर सन् १९०७ में, गवर्मेंट ने कौंसिल के सामने पेश किया । कौंसिल में सारी मेम्बर अधिक होने के कारण वह बिल पास हो गया। जिस समय यह.बिल शिमले में वायसराय की कौंसिल में उपस्थित किया था उस समय गोखने महोदय ने निर्भय होकर बिल के पास किए जाने का खूध ही कड़े शब्दों में विरोध किया। आपने कहा किः- "इस प्रकार यिल पाम -