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मानसिक विकास

आधुनिक युग को विद्वानों ने मनोवैज्ञानिक युग कहा है । इससे पहले के युग को वैज्ञानिक युग कहा गया था । सचमुच आधुनिक युग में मनोविज्ञान का जितना विकास और प्रचार हुआ उतना किसी विद्या का नहीं । वैसे तो आज भी विज्ञान अपनी चरमसीमा पर है । परमाणु शक्ति का आविष्कार एक महान् विप्लवी आविष्कार है जिसने सारे संसार को दहला दिया है और इस शक्ति के आधार पर वैज्ञानिक एक नये युग की कल्पना कर रहे हैं जो मनुष्य के जीवन को कहीं अधिक विकासोन्मुख कर देगा । परन्तु इस समय उपयोग में मनोविज्ञान सबसे अधिक है । पिछले महायुद्ध के कारण राष्ट्रों की शक्ति का अति ह्रास हुआ । एक दुसरे से लड़कर सभी अपनी शक्ति खो बैठे । जब मनुष्य की शक्ति का ह्रास हो जाता है तब उसके सामने यह प्रश्न होता है कि वह किस प्रकार जीवित रहे । उसमें भय अधिक समा जाता है । उसके मस्तिष्क पर आतंक छा जाता है । वह मामूली बातों में भी डरने लगता है । परन्तु ऐसे समय में बाह्य शक्ति तथा शारीरिक शक्ति के नष्ट होने पर, अपने जीवन को बनाये रखने के लिए उसे अपनी मानसिक शक्तियों का सहारा लेना पड़ता है । आज एटम बम की चर्चा होती है। एटम बम में वही शक्ति बतायी जाती है जो शिव के ताण्डव में थी। पल भर में एटम बम सारे संसार को तबाह कर सकता है । कहा जाता है, यह एटम बम अब किसी एक के नहीं, अपितु दोनों विरोधी दलों के पास है । यह भी सब को ज्ञात है कि इस शक्ति से बचने का कोई दूसरा उपाय नहीं है । परन्तु इसका उपयोग अभी ये राष्ट्र नहीं कर रहे हैं क्योंकि लोग जानते हैं कि एटम बम से अधिक शक्ति मनोविज्ञान में है । केवल एटम बम का भय दिखाकर जो काम हो सकता है वह एटम बम के उपयोग से भी नहीं हो सकता । लोगों का ख्याल है कि युद्ध बन्द हो गया है, परन्तु युद्ध बन्द नहीं हुआ है, युद्ध का रूप बदल गया है। आज भी युद्ध हो रहा है और यह युद्ध मनोवैज्ञानिक युद्ध है । आज की शिक्षा,राजनीति, व्यापार सभी मनोवैज्ञानिक ढंग से हो रहे हैं और आज की कला भी मनोवैज्ञानिक कला हो गयी है । आज मनोवैज्ञानिक कला का जितना प्रचार है, किसी दूसरी प्रकार की कला का नहीं ।