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"आज अखिल भैय्या श्रापंगे। स्टेशन चलने के लिये तैयार रहना अम्मा कार मेज दंगों"।

"मैने तुम से कर कहा था कि में स्टेशन जाऊंगा जो तुम मुझसे तैय्यार रहने के लिए कह रही हो ? मेरे पास न अखिलेश ने सूचना भेजी है और न मे जाऊंगा तुम्हारे पास सूचना श्राई है तो तुमचली जाना"।

विनोद ने कहा, और अपना कोट उठा कर फिर थाहर जाने के लिये तैयार हो गए। उन्हें रोकती हुई विमला ने फिर नन स्वर में कहा-

"सूचना नहीं भी पाई तो चलने को क्या हुश्रा तुम्हारे मित्र ही तो हैं?

"चलने को क्या हुआ, इसका उत्तर में नहीं दे सकता । नहीं जाना चाहता यही काफी है" कहते हुए विनोद फिर श्रागे बंद, विमलाने उनफा कोट पकड़ लिया बोली-

"तुम नहीं जानोगे तो सब लोग पुरा न माने गे? चलो हम लोग स्टेशन से अपने घर आ जायगे उनके घर न जायगे यस"

विनोद ने चिढ़ कर कहा-

"क्यों सिर खाये जाती हो विन्नो ! एक बार कहतो दिया कि मैं न जाऊंगा । तुम्हारा भाई है, तुम खुशी से जाओ. मैं तुम्हें नहीं रोकता । तुम जाना चाहती हो तुम्हें न जाने के लिए मैं विवश नहीं करता, फिर तुम्ही क्यों चलने के लिए मुझ पर इतना दवाव डाल रही हा"

कहते हुए कोट छुड़ा कर विनोद चल दिए। विमला