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गया और दोनों का समय बड़े आनन्द से कटने लगा। 'काव्यशास्त्र विनोदेन कालोगच्छति धीमताम्।'

विवाह होने पर मिल ने छः मास इटली, सिसली तथा यूनान में भ्रमण किया। सन् १८५६-५८ ई॰ में मिल ने स्वाधीनता (Liberty) नामक ग्रन्थ की रचना की। मिल का यह ग्रन्थ बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस ग्रन्थ के लिखने में मिल ने जितना परिश्रम किया था, उतना और किसी ग्रन्थ के लिखने में नहीं किया। मिल की पत्नी ने भी इस ग्रन्थ के लिखने में बहुत सहायता दी थी। इस ग्रन्थ को मिल तथा उसकी पत्नी की संयुक्त-रचना कहना अधिक उपयुक्त होगा।

सन् १८५६ ई॰ में फ्रांस में प्रवास करते समय मिल की प्यारी स्त्री का कफ़ रोग के कारण, स्वाधीनता के प्रकाशित होने से पहिले ही, स्वर्गवास हो गया। पत्नी-वियोग के असीम दुःख के कारण मिल स्वाधीनता का अन्तिम संशोधन नहीं कर सका। मिल ने यह ग्रन्थ अपनी पत्नी ही को समर्पित किया है। यह समर्पण पढ़ने योग्य है।

इस के बाद मिल ने पार्लियामेन्ट के सुधार-संबन्धी विचार (Thoughts on Parliamentary Reform) नामक ग्रंथ लिखा। इस ग्रन्थ में मिल ने इस विषय पर विचार किया है कि गुप्त वोट (राय) देने की प्रथा अच्छी नहीं है तथा थोड़े वोट मिलने वाले कुछ प्रतिनिधियों को भी पार्लियामैन्ट में रखना चाहिये।

सन् १८६० और १८६१ ई॰ में मिल ने प्रतिनिधि सत्तात्मक राज्य व्यवस्था (Representative Government) तथा स्त्रियों की पराधीनता (Subjection of Women) नामक दो और विद्वत्ता पूर्ण तथा सारगर्भित ग्रन्थों की रचना की।