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इतिहास तिमिरनाशक


करके सर्कारी फ़ौज के मुक़ाबले को भेजा। इसने भी बीड़ा उठाया कि बे फ़रंगियों के निकाले दौर में मुंह नहीं दिख- लाऊंगा लेकिन सच उसने मुह नहीं दिखलाया। कईलड़ाइयों के बाद डुनाव्यू के क़िले में बान लगकर मर गया। निदान जब सर्कारी फ़ौज इन्हें शिकस्तदेतीइनके क़िलेऔरतोपखानेले. ती फतहके निशान उड़ाती आवासे कुलचारमंज़िलइधरयंडाबू में जा पहुंची। राजानेघबराकरसुलहकरली। चारशिस्तमिएका १८२६ ५० करोड़ रुपया लड़ाई के खर्चबाबतदिया। और आसाम अरा- कान और मर्तबान के दखन का बिलकुल मुलक छोडदिया।

इसी लड़ाई के शुरू में सैंतालीसवीं पल्टन को और दो पलटनों के साथ जो बारकपुर को छावनी में थीं रंगून हुक्म हुआ था। सिपाही समुद्र का नाम और बम्हाँ की आबहवा और रामको कत्लका हालसुनकर हिचकिचा गये जाने से इनकार किया। परेड पर दो गोरोंको घम्टनें कलकत्ते में बुलायी गयीं सैंतालीसकों के बहुतेरे सिपाही तोपसे उड़ा दिये गये बहुतेरे फांसी पड़े बहु तेरों ने केद में मिट्टी काटी बाकी के नाम कट गये।

भरतपुर में। सन१८२३। राजा रंजीतसिंहके बेटेरणथीर सिंह के लावल्द मरने पर रणधीरसिंह का भाई बलदेवसिंह गद्दी पर बैठा। उसकेभतीजे दुर्जनसालने इसझूठीबातपर कि मुझे रणधीर सिंहने गोद लिया था गद्दीका दावाकिया। बल- देवसिंह ने अपने लड़के बलवन्त सिंहको रजपुतानेकेरजीडंट सर डेविड कांफरलोनी की गोद में रख दिया। और कहा कि दुर्जनसाल ज़रूर मेरे बाद बखेड़ा करेगा मैं चाहता हूं कि प्रांप मेरे रहते मेरे लड़के को सर्कार की तरफ से गट्टी या


  • लेकिन अपनी तवारीखों में यही लिखा कि किसी टापू जंगली आदमी भूलकर इस मुलक पर चढ़ आये थे जब भूखों मरने लगे दयावान महाराज ने करोड़ रुपया राहवर्च देकर अपने वतन को लौट जाने की इजाजत मरहमतफाई यह हाल हैं रशिया को तवारीखों का!