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इतिहास तिमिरनाशक


सुलह का भेजा। लेकिन जब सर्कार ने देखा कि वह ख़ाली दिन बिताना चाहते हैं और दूसरे साल फिर लड़नेका सामान तैयार करते जाते हैं सतरह हज़ार फ़ौज देकर जेनरल अकृर लोनी की कि अब ख़िताब मिलकर सर डेविड अकृरलीनी हो गया था नयपाल पर चढ़ाई करने का हुक्म दिया। इसने अपना लश्कर ऐसे ऐसे घाटे से और नाले खोलोसे कि जहांँ घने जंगलों के सबब सूरज की किरण भी नहीं पहुंचती थी निकालकर मकावनपुर से कोस भर के अंदर जा डाला। ओर एक अच्छी लड़ाई लड़ा। ५०० आदमी नयपालियों के मारे गये क़िलेदार ने कि काज़ी भीमसेन का भाई था कहला भेजा आप क्यों लड़ते हैं महाराज ने आप के कहने बमूजिक सुलहनामे पर दस्तख़त करदिया निदान इस सुलहनामे के बमूजिब काली नदी नयपाल की बच्छम सर्हद्द ठहरी। और शिकम के राजा की ज़मीन जो नयपालियों ने दबा ली थी पूरब में उसे लौटवा दी गयी। और काठमांडू में एक सर्कारी रज़ीर्डट का रहना फ़रार पाया। गवर्नर जेनरल को शाह के यहां से मार्किस अाफ़ हेस्टिंग्ज़ का ख़िताब मिला और पर डेविड अकृरलोनी के नाम में शुकराना आया

इस में शक नहीं कि मरहठों का ज़ीर घटा दिया गया था। पर उनका हौसिला भुभल में दबेहुए अंगारे को तरहसुल गतारहा। पेशवा फिर भी इनका पेशवा बनने की आर्जू रखता था‌। छुप छुप के नागपुर ग्वालियर और इन्दोर यानी भोसला सेंधिया और हुल्कर के पास आयाम भेजता रहताथा। बडोदे- वाला गायकवाड़ सर्कार के कहने मेंथा। इसीलिये पेशवा उस से ख़ार खाता था। आपस की किसी तक्रार के तस्फ़िये के लिये जब सर्कार ने जान की जिम्मेबरी लेकर गायब- वाड़ की तरफ़ से गंगाधरशास्त्रोको पेशवा के पास भिजवाया। पेशवा पंडरपुरमें था उसके मंची यानो दीवान विम्बकजी ने उसे पंडरनाथ के दर्शन को बुलाया। जब यह दर्शन