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विहंगमधी भामरे से भाग गहरा अपमेहमी मौतों मोरारपियों से मर स्वाइस बाबसारत-से प्रामरे में चोर गया था, अपने पो में कर लिया भोर राय पर्विाना सीरी अपने हरम में दाखितो उस नाम उदयपुरी मम महूर पर रिया सापति यातीबराव पोर पो पर अपना कारविन। मुहम्मद मुजवान को पालियर मेग दिवस मना । मुखमाद नाम कहियो रे भायरे के बिमार बना दिमे चारा धाप पड़ी सच्ची मोर निदरता माहार किया। इन दिनों पिता पुत्र में ही परमापारमा, उसमें पोराग में अपनी बायपरता और नमका पूरा विसावा करते हुए, और अपने पिता यावन के प्राण और प्रकाश प्रवेर भरने प्रमों समन किया। रतने पापयार प्रेलिश दिया मव की बामोर पाहाव में थी, मैंने बिना मारकमको धम नहीं मिला। प्रापीमारी में राय ने राम प्रपने एप में से सिपा और नाम सिहा पाहि। मेयरयदा मिनी परम पामरे में माने नहीं पा । मैं वो फिदाय शाम रोिपी नामो प्रोर महसना पास करना चावा पा। भारणार बनने में मेरा प्ररना इव मी साईन या चार लिए पा मुनासिब नही मि वा अपने ऐयोमाराम में लगाये। उठ बिपाश्राम मोयों मचाई में अपना सारा समय बयाए । पाया औरझवी हा प्रौर सवले ममता था, और रने पर भी समम निपा वाम उस ई चारा नही पसना अन्त में हार मानन्न भागो दुर्भाग्य सामने रिना पड़ा। एक बार एकदापी पोर पर पसी। पण, मगर मोर इसमान न किए गर । ए मेपो रे में ग्रार साभि सिपर बनना पड़ा। अन्त में उसने परम