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आर्थिक भूगोल

आर्थिक भूगोल प्रतिशत से अधिक सीमेंट तो इस समय भी भारतीय कारखाने ही तैयार करते हैं। सीमेंट के लिए लाइम-स्टोन ( Lime Stone) चिकनी मिट्टी (Clay) तथा कोयले की आवश्यकता होती है। थोड़ा जिपसम (Gyp- sum ) भी श्रावश्यक है । भारतवर्ष में लाइमस्टोन बहुत अच्छा और ढेरों मिलता है। मिट्टी भी मिलती है। देश में जिपसम निकाला जाता है किन्तु बहुत- दूर से लाना पड़ता है । कोयले की भी यही दशा है। अधिकांश सीमेंट के कारखाने उन स्थानों पर स्थापित किये गये हैं जहाँ कि अच्छा, लाइमस्टोन मिलता है। किन्तु जहाँ भारतीय सीमेंट के कारखानों को लाइम- स्टोन और चिकनी मिट्टी मिलने की सुविधा है वहाँ सबसे बड़ी कमी यह है कि कोयले की खाने बहुत दूर है। इस कारण कोयले के लिए बहुत व्यय करना पड़ता है। लाइमस्टोन और चिकनी मिट्टी के मिक्सचर को तेज़ आंच देकर सीमेंट तैयार किया जाता है। मिक्सचर में तीन चौथियाई कैलसियम कारबोनेट (Calcium Carbonate ) तथा एक चौथियाई चिकनी मिट्टी रहती है। मिक्सचर में थोड़ा सा जिपसम भी रहता है । कहीं कहीं लाइमस्टोनं ऐसा पाया जाता है कि जिसमें सभी आवश्यक चीजें ठीक मात्रा में मिलती हैं और अन्य वस्तुयें मिलानी नहीं पड़ती। 'मदरास, सिंध और काठियावाड के सीमेंट के कारखानों को छोड़ कर और सभी कारखाने देश के भीतरी भागों में स्थित हैं। इस कारण वे सीमेंट को अपने क्षेत्र में आसानी से बैंच सकते हैं । हाँ मदरास, सिंघ और काठियावाड़ के सीमेंट के कारखानों को जो कि बंदरगाहों. में हैं विदेशी सीमेंट की प्रतिद्वन्द्विता का सामना करना पड़ता है। भारत सरकार ने बाहर से आने वाले सीमेंट पर 8% की ड्य टी लगा दी है। सीमेंट के कारखाने ग्बालेयर, कटनी, बूंदी, बिहार, बंगाल, काठियावाड़, सिंध तथा मदरास में हैं। अब तो सीमेंट के कारखानों का एक संघ बन गया है। इस कारण धंधा और भी संगठित रूप से उन्नति कर रहा है। भारतवर्ष के कारखानों में लगभग १२. लाख टन सीमेंट तैयार होता है । सन् १९३७ में भारतवर्ष के कारखानों में ११.४ लाख टन सीमेंट तैयार हुआ । जब कि संसार भर के सब देशों ने ८० लाख टन से कुछ कम सीमेंट तैयार किया। १९३८ में संयुक्त राज्य अमे- रिका ने १८३ लाख टन, जर्मनी ने १५६ लाख टन, ब्रिटेन ने ५६ लाख टन और भारतवर्ष ने १२ लाख टन सीमेंट उत्पन्न किया । १९३८ में संसार के सब देशों ने ८२५ लाख टन सीमेंट तैयार किया था।