पृष्ठ:आर्थिक भूगोल.djvu/४७०

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बीसवां परिच्छेद
खेती(Agriculture)

. बीसवों परिच्छेद aat ( Agriculture) भारतवर्ष कृषिप्रधान देश है। लगभग ७३ प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। इसी से कृषि का महत्त्व भारतवर्ष में खेती स्पष्ट है। गाँवों में किसानों के अतिरिक्त खेत मजदूर का महत्त्व बढ़ई, लुहार इत्यादि जो कारीगर हैं वे भी खेती पर ही निर्भर हैं। संसार में चीन के अतिरिक्त अन्य किसी भी देश में इतने अधिक मनुष्य खेती पर निर्भर नहीं हैं। यदि किसी वर्ष 'वर्षा की कमी से अथवा अन्य प्राकृतिक कारण से फसलें नष्ट हो जाती हैं तो भारतवर्ष का आर्थिक ढाचा हिल उठता है। फसलों के नष्ट हो जाने से विदेशों को भेजे जानी वाली वस्तुएँ कम हो जाती हैं। किसान के पास रुपया नहीं होता । इस कारण वह विदेशों से आने वाले माल तथा भारतीय मिलों में तैयार माल को खरीद नहीं सकता। दूसरे शब्दों में भारतवर्ष का व्यापार कम हो जाता है और उद्योग-धन्धे शिथिल पड़ जाते हैं। सरकार को.. पूरी मालगुजारी नहीं मिलती। रेलों को माल ढोने के लिए कम मिलता है, किसान मेले और यात्राओं को कम जाते हैं। अतएव उन्हें घाटा होता है। कहने का तात्पर्य यह कि देश का सम्पूर्ण आर्थिक ढाँचा खेती पर अवलम्बित है। "जिस धन्धे पर देश की लगभग तीन चौथाई जनसंख्या निर्भर है उसकी दशा अत्यन्त गिरी हुई है। भारतवर्ष में प्रति एकड़ खेती की दशा भिन्न भिन्न फसलों की पैदावार अन्य देशों की अपेक्षा बहुत कम है। जहाँ प्रति एकड़ भारतवर्ष में - पौंड कपास उत्पन्न होती है वहाँ संयुक्तराज्य अमेरिका में प्रति एकड़ २५० पौंड और ईजिप्ट में,४०० पौंड कपास प्रति एकड़ उत्पन्न होती है। भारतवर्ष में प्रति एकड़ इङ्गलैंड की तुलना में चौथा हिस्सा गेहूँ और जो उत्पन्न होता है। क्यूबा और जावा की तुलना में यहाँ प्रति एकड़ चौथे हिस्से से भी कम गन्ना उत्पन्न होता है । संक्षेप में भारतवर्ष में . प्रति एकड़ पैदावार बहुत ही कम होती है । इसका मुख्य कारण यह है कि यहां वैज्ञानिक ढंग से खेती नहीं -