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आर्थिक भूगोल

. 5 प्राधिक भूगोल कम उत्पन्न होती है। इसका एकमात्र कारण यह है कि देश में प्रौद्योगिक उन्नति नहीं हुई है। भारतवर्ष की भावी प्रौद्योगिक उन्नति के लिए जल विद्युत् की उन्नति । आवश्यक है। इसका कारण यह है कि एक तो भारत कोयले की दृष्टि से धनी नहीं है और जो कुछ भी कोयला है वह देश के पूर्व में है इस कारण बहुत से प्रान्त कोयले के क्षेत्र से बहुत दूर हैं और वहाँ औद्योगिक उन्नति तभी हो सकती है.जबकि शक्ति के साधन उपलब्ध किये जावें । अस्तु . देश की भावी औद्योगिक उन्नति के लिए जन-विद्युत् का महत्वः स्पष्ट है। इसी कारण युद्ध के.. उपरान्त जो आर्थिक योजनायें -बनाई गई हैं उनमें जल विद्युत की योजनाओं को पहला स्थान दिया गया है। कुछ योजनायें तो हाथ में ले ली गई हैं उन पर कार्य प्रारम्भ हो गया और कुछ योजनायें भविष्य में पूरी की जावेगी। इसमें कोई संदेह नहीं कि जब ये योजनाये तैयार हो जावेगी तब देश के प्रत्येक. भाग में . यथेष्ट शक्ति उत्पन्न होगी और खेती तथा धन्धों की आश्चर्यजनक रीति से उन्नति होगी। अब हम यही नवीन योजनाओं का संक्षिम विवरण देंगे। यह बात ध्यान. में रखने. की है कि मावी जल-विद्युत् योजनाओं के साप सिंचाई .की योजनायें भी सम्बद्ध हैं। नवीन योजनाओं में दामोदर घाटी योजना सब से. अधिक महत्वपूर्ण है। यह एक बहुमुवी योजना है। इस योजना के दामोदर घाटी पूरी हो जाने पर दामोदर नद में जो भीषण बाढ़ें योजना पाती हैं उनको सात बड़े बाँध बना कर रोका जावेगा और इस प्रकार अपार जन धन की जो आज हानि होती है उससे रक्षा की जा सकेगी। नदी के जल से सिंचाई होगी, उसमें नावों द्वारा माल लाने और ले जाने की सुविधा हो जावेगी और बहुत अधिक जल-विद्युत् उत्पन्न की जावेगी जिससे कि बिहार और बंगाल में उद्योग धन्धों की उन्नति हो सकेगी।

दामोदर नदी और उसकी सहायक बाराकर नदी पर बांध बनाकर बाढ़ों

को बिलकुल रोक दिया जावेगा। नीचे लिखे स्थानों पर बाँध निर्मित किये जायेंगे। .: १. वाराकर नदी के मलपान स्थान पर

२. दामोदर नदी के कार सानोलापूर स्थान पर जो बाराकर एवं

दामोदरी नदी के संगम से ५ मील दूर है। देवलबारी-बाराकर नदी पर .