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व्यापारिक मार्ग तथा व्यापारिक केंद्र

व्यापारिक मार्ग तथा व्यापारिक केन्द्र २५ 'निकाली गई है। यह नहर बाल्टिक समुद्र को नार्थ-सी ( North Sen ) से यल्ब के पास मिलाती है और केवल ६१ मील लम्बी है । यह २५ में बनी । यह ३८ फीट गहरी है और तले में १४४ फीट चौड़ी है इस कारण बड़े जहाज़ आसानी से उसमें से जा सकते हैं। यह नहर विशेषकर जरमनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह नहर १८६४ में बनी । मरसी नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित ईस्थाम से मैंचेस्टर तक यह ३५३ मील लम्बी है। इसकी कम मैंचैस्टर से कम गहराई २८ फीट और कम से कम चौड़ाई शिप कैनाल १२० फीट है। यह व्यापारिक दृष्टि से बहुत महत्व पूर्ण है। इसके बनने के पूर्व मैंचेस्टर को कपास लिवरपूल बंदरगाह से रेल द्वारा पाती थी किन्तु इस नहर में होकर अब जहाज़ सीधे मैंचेस्टर तक पहुँच जाते हैं। ऐम्स्टर्डम कैनाल ऐम्सटर्डम कैनाल-ऐम्सटर्डम का नार्थ-सी (North Sen) से सीधा सम्बंध स्थापित करती हैं। स्टैलिन नहर के द्वारा बाल्टिक समुद्र को आर्कटिक महासागर में मिला दिया गया है । यह नहर लेनिनग्राड को स्वेत. सागर स्टैलिन कैनाल ( White Sea-) से जोड़ती है। - पुराने समय में समुद्र अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए बाधक था किन्तु आज तो समुद्र सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग बन गया है। जो देश समुद्र के किनारे स्थित हैं बाज उन्हीं का व्यापार उन्नत अवस्था में है। आधुनिक समय में व्यापार के लिए बन्दरगाह आवश्यक हैं। यही कारण है कि जिन देशों के पास बन्दरगाह नहीं हैं वे दूसरे देशों के बन्दगाहों को छीन लेना चाहते हैं। बीसवीं शताब्दी में समुद्र के समीपवर्ती देशों का महत्त्व बहुत बढ़ गया है। आजकल सामुद्रिक मार्ग का महत्त्व इतना अधिक बढ़ गया है कि देशों की शक्ति तथा व्यापारिक उन्नति का अनुमान जहाज़ों से किया जाता है। ब्रिटेन तथा संयुक्तराज्य अमेरिका की उन्नति का कारण उनकी बढ़ी हुई नाविक शक्ति ही है। .

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