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मुख्य धंधे-खनिज सम्पति

. मुख्य धन्धे-खनिज सम्पत्ति २११ भारतवर्ष में है ) और उनमें बहुत अधिक पूंजी लग जाती है । उस पूंजी का सूद व्यय में जोड़ने से शक्ति का लागत खर्च अधिक बैठता है। परन्तु यदि पानी को सिंचाई के काम में लाया जा सके जैसा कि संयुक्तराज्य में हुमा है तो यह खर्चा कम हो सकता है। अभी तक जल शक्ति-का यथेष्ट उपयोग नहीं हो सका है। अनुमान यह किया जाता है कि पृथ्वी की समस्त जल-शति की केवल ५ प्रतिशत जल- शक्ति इस समय उत्पन्न की जा रही है। सबसे अधिक जल-शक्ति संयुकराज्य अमेरिका तथा कनाडा में उत्पन्न की जाती है। नायगरा ( Niagara ) जलप्रपात से अनन्त जल-विद्युत् उत्पन्न की जा सकती है । नायगरा नदी ईरी ( Erie) तथा आन्टैरियो के बीच में ३२७ फीट की ऊँचाई से गिरती है। नायगरा जलप्रपात के जल से कनाडा तथा संयुक्तराज्य अमेरिका दोनों ही बिजली उत्पन्न करते हैं। अधिकांश बिजली उत्पत्ति-स्थान के समीपवर्ती प्रदेश में ही कामं आती है। वैसे नायगरा जलप्रपात की बिजली २५० मील तक ले जाई गई है। अभी हाल में सेंट लारेंस नदी के जल से भी बिजली उत्पन्न की जाने लगी है। सच तो यह है कि राकी पर्वत माला तपा अपलेशियन पहाड़ों में -विद्युत् का अत्यधिक विस्तार यदि भविष्य में जल विद्युत् को उत्पन्न करने में विशेष उन्नति हुई तो फिर एक औद्योगिक क्रान्ति ( Industrial Revolution ) होगी। जलविद्युत् के सुलभ हो जाने पर धंधों के केन्द्रीयकरण (Centra- lisation) की आवश्यकता नहीं होगी वरन वे कहीं भी ग्रामों में स्थापित किये जा सकेंगे। इसका परिणाम यह होगा कि घनी आबादी से उत्पन्न होने वाली समस्यायें स्वतः ही हल हो जावेगी । कारखाने के मजदूर खुली हवा में अपने घरों के स्वास्थ्यप्रद वातावरण में रह सकेंगे। चिमनियों से निकलकर धुश्री शहरों पर नहीं फैलेगा और शहरों की गंदगी बहुत कुछ दूर हो जावेगी। यही नहीं जल-शक्ति के सुलभ होने पर गृह-उद्योग-धंधों ( Cottage Industries ) की भी उन्नति हो सकेगी। क्योंकि उस दशा में प्रत्येक कारीगर शक्ति का उपयोग आसानी से कर सकेगा और सस्ते तथा हल्के यन्त्रों द्वारा चीजें बनाकर वह भी बड़े कारखानों की प्रतिद्वन्दिता में अपना माल बेंच सकेगा। बड़ी मात्रा की उत्पत्ति ( Large-Scule- production ) की सबसे अधिक. बचत इसमें है कि उसमें शक्ति का उपयोग हो सकता है किन्तु एक जुलाहा तो एक स्टीम ऍजिन मोल नहीं ले सकता । बिजली के सुलभ होने पर यह अड़चन नहीं रहेगी । यही नहीं जल- है।