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आनन्द मठ

दिया गया था कि अवसर आ जानेपर संन्यासियों को दवाकर वे लोग बिहार की तरफ बढ़े और यहां कप्तान जोन्स से मिलकर शान्ति-स्थापन की चेष्टा करें।

“संन्यासियों के बहुत से दल पुर्निया जिले में घुस पड़े और गांवों में आग लगाकर लोगों का मालमता लूटने और बरवाद करने लगे। तब वहां के कलक्टर ने कप्तान ब्रुक के पास समाचार भेजा और सहायता मांगी। कप्तान ब्रुक हालही में राजमहल के पास पानीती आये थे। उनके पास एक ताजाद मे पैदल सेना थी। कप्तान ने खबर पाते हो नदी पार कर संन्यासियों के विरुद्ध काररवाई करनी शुरू की। उस समय संन्यासी कोसा-नदी पार कर भाग जाने की चेष्टा कर रहे थे। इसी समय कप्तान के साथ उनके एक दल की मुठभेड़ हो गयी, पर विना किसी क्षति के वे सब नदी पार कर गये जिससे ये लोग उनका कुछ भी बिगाड़ न सके। यह साफ मालूम पड़ता है कि संन्यासी यथाशीघ्र कम्पनी के अधिकार-भुक्त प्रदेश से भाग जाना चाहते हैं। पर मुझे विश्वास है कि उनके कुछ गिरोहों के साथ हमारी किसी न किसी सेना का मुकाविला अवश्य ही हो जायगा और वह उनकी उद्दण्डता का उन्हें पूरा पूरा दण्ड दे सकेगी।

यद्यपि यह असम्भव है, तथापि इन संन्यासियों के उपद्रवों के कारण मालगुजारी में कमी पड़ने की सम्भावना मालूम होती है; क्योंकि कहीं के लोग तो सचमुच इनसे सताये गये हैं और कहीं के लोग झूठमूठ यह बहाना निकालेंगे कि वे लोग भी संन्यासियों द्वारा लूटे-खसोटे गये हैं। इसी विचार से बोर्ड आफ़ रेवेन्यू ने यह प्रस्ताव किया है कि मालगुजारी में कमी पड़ने का कोई कारण नहीं सुना जायगा और त्रुटि करनेवालों को दण्ड दिया जायगा। इस तरह से वे लोग कम्पनी को हानि से बचाने की पूरी चेष्टा कर रहे हैं। जहां-तहां सीमापर पलटने रख दी जायंगी, ताकि फिर