पृष्ठ:अहिल्याबाई होलकर.djvu/७५

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राव को सरदारी वस्त्र पहना कर उनका गौरव बढ़ाया था। तदनंतर बाई से विदा होकर गुजरात प्रदेश में भ्रमण करते हुए वे पूना पहुँच गए।

इस प्रकार जब गंगाधरराव की दुष्टता से पूर्ण प्रत्येक चालाकी का यथायोग्य उत्तर बाई देती रही, तब वह बहुत ही पश्चात्ताप करने लगा और विचार करने लगा कि अब मैं अहिल्याबाई के सम्मुख पहुँच कर किस मुँह से कार्य के निर्वाह पूरने की आज्ञा चाहूँ; क्योंकि मेरी दुष्ट भावनाओं और कृत्यों का समाचार बाई को विधिपूर्वक ज्ञात हो चुका है। इस कारण मलिन अंत:करण से निरुद्योग और उदासचित हो तीर्थयात्रा के बहाने वह दक्षिण को चला गया। गंगाधरराव के दक्षिण में पहुँचने का समाचार जब पेशवा सरकार को विदित हुआ तब उनको इसके संबंध में और अधिक विचार उत्पन्न होने लगा कि यह दुष्ट न जाने और क्या आपत्ति उठावे। इस कारण से पैशवा सरकार ने इसके मनोविचारों को जानने तथा किसी राज्यसंबंधी कार्य में वह हस्तक्षेप न करे, इस अभिप्राय से कुछ गुप्तचर हाल चाल जानने के हेतु से छोड़ दिए। पेशवा सरकार दुसरों के हाल जानने के हेतु बहुधा ऐसा ही प्रयत्न किया करती थी। गंगाधरराव ने नाना प्रकार के क्लेशों को भोग पेशवा सरकार से पुनः किसी पद पर नियत होने का अनुरोध किया, परंतु वह सब व्यर्थ हुआ। अंत में उसने विचार किया कि पेशवा सरकार का मल्हारराव होलकर को दिया हुआ एक छोटा सा दुर्ग यहाँ दक्षिण में हैं, वहीं पर पहुँच अपना समय व्यतीत करना उत्तम है। परंतु असल भेद और ही कुछ था। यह जब उस-