पृष्ठ:अहिल्याबाई होलकर.djvu/१६७

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की संपत्ति का कोई अधिकारी न था। यह जान सीरोज के अधिकारी ने उस विधवा से कहला भेजा कि तेरा संपूर्ण धन सरकार में जब्त कर लिया जायगा क्योंकि इसका अधिकारी एक स्त्री के अतिरिक्त कोई नहीं है, इस कारण यदि तू मुझको तीन लाख रूपया दे देगी तो सारी संपत्ति का अधिकार तेरे ही नाम पर मैं कर दूंगा। खेमदास की स्त्री जिसकी अवस्था छोटी थी, और जो राजदरबार के नाम से डरती थी अपने धन में से तीन लाख रुपया अधिकारी को उसकी धमकी में आकर देने को उद्यत हुई । यह जान उसकी जाति के एक शुभचिंतक ने यह सारा वृत्तांत अहिल्याबाई के पास जाकर सुनाने की अनुमति दी आर किसी को गोद लेकर धन का अधिकारी बनाने को भी कहा । अधिकारी जो धन मांगता है वह बहुत है इसलिये पहले उसको विधवा ने कुछ द्रव्य देकर शांत करना चाहा परंतु सब निष्फल हुआ। यह देख अंत को उस विधवा ने अपनी बहन के लड़के को साथ लेकर अहिल्याबाई से यह सारा हाल जाकर सुनाने का और उस लड़के को गोद लेने की प्रार्थना करने का निश्चय किया । जब अहिल्याबाई को यह सारा हाल उसने रो सुनाया तब बाई ने तत्काल उस अधिकारी को पदच्युत कर इस लड़के का दत्तक होना मंजूर कर लिया । इतनाही नहीं परंतु बाई ने उस लड़के को अपने पैर पर बैठाल कर उसको वस्त्र और पालकी दी ।

जब यह हाल लोगों को मालूम हुआ तब सारी प्रजा बाई को मुक्त कंठ से धन्यवाद देने लगी और यही कारण है कि