पृष्ठ:अनासक्तियोग.djvu/१७

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4 पहला अभ्याब पवुनविषादयोग धृष्टकेतु, चेकितान, शूरवीर काशिराज, पुरुजित्, कुंतिभोज और मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैव्य, युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् । सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ।।६।। इसी प्रकार पराक्रमी युधामन्यु, बलवान उत्त- मौजा, सुभद्रापुत्र (अभिमन्यु) और द्रौपदीके पुत्र, ये सभी महारथी हैं। ६ अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम । नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ॥७॥ हे द्विजश्रेष्ठ ! अब हमारी ओरके जो मुख्य योद्धा हैं उन्हें आप जान लीजिए। अपनी सेनाके नायकोंके नाम में आपके ध्यानमें लानेके लिए कहता हूं। भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिंजयः । अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥८॥ एक तो आप, भीष्म, कर्ण, युद्धमें जयी कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्तके पुत्र भूरिश्रवा, ८ अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः । नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः ॥९॥ दूसरे भी बहुतेरे नाना प्रकारके शस्त्रोंसे युद्ध करनेवाले शूरवीर हैं, जो मेरे लिए प्राण देनेवाले हैं। वे सब युद्ध में कुशल हैं। ९ ७