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अदल-बदल :: ६१
 


के तत्त्व को जानती है, मैं उसके चरणों का दास हूं।'

'आपने तो मेरा दुःख बढ़ा दिया। मेरा दुखता फोड़ा छू दिया।'

'अब इस फोड़े को चीरकर इसका सब मवाद निकालकर अच्छा करूंगा।'

'डाक्टर, आप आशाओं का बहुत बोझ मत लादिए।'

'वाह, आशा का संदेश तो आप ही की में है।' डाक्टर ने मायादेवी की तरफ एक दुष्टताभरी दृष्टि से देखकर हंस दिया।

मायादेवी ने नकली क्रोध से कहा--'ओफ, आप गोली मारकर हंसते हैं डाक्टर!'

'गोली मारना वीरता का काम है, और गोली मारकर हंसना, तो वीरता से भी बढ़कर है। तो आपके कथन का मतलब यह हुआ कि मैं अपने से भी बड़ा हूं।'

इतना कहकर उस डाक्टर ने एकाएक मायादेवी का हाथ पकड़ लिया,और कहा--'मायादेवी, मैं समझता हूं कि तुम गलत जगह पर आई हो, मैं तुम्हारा हाथ पकड़कर संसार में उतर पड़ना चाहता हूं।'

'मैं ऊब गई हूं।' माया ने वेग से सांस लेकर कहा।

'तो साहस करो!' डाक्टर ने माया का नर्म हाथ अपनी मुट्ठी में कस लिया।

'मगर कैसे?' मायादेवी ने बेचैन होकर कहा।

'हिन्दू कोडबिल हम पर आशीर्वाद की वर्षा करेगा, समझ लो, वह तुम्हारे और मेरे लिए ही बन रहा है। आओ, दुनिया के सामने नया आदर्श उपस्थित करो।'

मायादेवी ने घबराकर अपना हाथ डाक्टर के हाथ से खींचकर कहा--'ठहरो, मुझे कुछ सोचने दो।'