पृष्ठ:अजातशत्रु.djvu/१२९

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दृश्यमा स्थान--कौशाम्बी का पप । [नावफ और बसतक] घेसेन्सक-" (हँसता हुभा) सय इसमें मेरा क्या दोप?" जीवक-"जब तुम दिन राव राजा के समीप रहते हो और जनक सहयर मनने का तुम्हें गव है, वध नुमने क्यों नहीं ऐसी चेष्टा की।" यसन्सक-"कि राजा बिगड़ जायें।" नोक-"भरे विगढ़ जाय कि मुधर जायें। पेसी बुद्धि पसन्तक- विकार है। जो इसना भी न समझे कि राजा अपने चाहे पीछे मुभर जाय, अभी तो हमसे बिगड़ जायेंगे।" । मोवा- 'सप सुम क्या करते हो ? पसन्तफ-"ठिन रात सोधा किया करते हैं। बिजली की रेखा की वरद टेदी जो राजराति से दिन रात संधार कर पुषकार कर, मयमोत होकर, प्रशसा करके सीधा करते हैं। नीं सोन नामे किम पर यह गिरे। फिर महाराज । पृथ्वीनाभ। गया है, प्राधर्य इत्यादि के कार्य मे पुटपाक. - " ५