पृष्ठ:अंधकारयुगीन भारत.djvu/५४

यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

( ३० ) अभिवर्द्धमान कोष दंड साधन' । वायु और ब्रह्मांडपुराणों में कहा गया है कि विंध्यशक्ति के वंश ने १६ वर्षों तक राज्य किया था । लेख में जो "सौ वर्ष' कहा गया है, वह उसी प्रकार कहा गया है, जिस प्रकार आज-कल हम लोग कहते हैं-'प्रायः एक शताब्दी तक'। मतलब यह कि यह बात प्रमाणित हो जाती है कि भूतनंदी नाग के वंशज ही भार शिव कहलाते थे। ४. भार-शिव राजा और उनकी वंशावली नव नाग ६२६. कौशांबी की टकसाल का एक ऐसा सिक्का मिला है जो अनिश्चित या अज्ञात वर्ग के सिक्कों में रखा गया है और जिस पर "[दे] व” पढ़ा जाता है। विसेंट स्मिथ ने अपने Catalogue of Indian Museum के पृष्ठ २०६, प्लेट २३ में इसका चित्र दिया है और उस चित्र की संख्या १५ और १६ है। यह सिक्का आगरा और अवध के संयुक्त प्रांतों में आम तोर से पाया जाता है। अभी तक निश्चित रूप से यह २. जिसके वंश में बराबर पुत्र और पौत्र होते चलते थे, जिसका राजकोश और दंड या शासन के साधन बराबर सौ वर्षों तक बढ़ते चलते थे ।-फ्लीट । ३. समाः षण्णवतिं भूत्वा [ ज्ञात्वा ], पृथिवी तु गमिष्यति । (Purana. Texts पृ० ४८ पाद-टिप्पणियाँ ८६, ८८)-"६६ वर्ष पूरे होने पर साम्राज्य (आगे देखो तीसरा भाग ६१५) का अंत हो जायगा ।"