पृष्ठ:दुर्गेशनन्दिनी प्रथम भाग.djvu/७८

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रहीम ने कहा, 'अपना २ काम करो' इस ओर कोई दृष्टिपात न करना, और वे सब ठिठक रहे। एक ने कहा, रहीम तू बड़ा भाग्यशाली है नवाबों के मुंह का निवाला छीन लेता है।

रहीम और विमला चले गये।

बिमला रहीम को अपने शयनागार के नीचे वाली कोठरी में ले जाकर बोली, 'यह हमारा नीचे का घर है। जो २ सामग्री इसकी तुमको लेना हो सब ले लो और इसके ऊपर मेरा शयनागार है, मैं अभी अपना अलंकार आदि लेकर आती हूं और उसके आगे एक तालियों का गुच्छा फेंक दिया।

रहीम बहु सामग्री संयुक्त घर देख कर सन्दूक पेटारा आदि खोलने लगा।

बिमला ने बाहर आकर कोठरी की कुंडी चढ़ा दी और शेख जी भीतर बन्द हो गए। सच है लालच विनाश करती है?

वहां से दौड़ कर विमला ऊपर वाले घर में गई, उसके और तिलोत्तमा के घर में केवल थोड़ा ही अन्तर था किन्तु लुटेरे अभी यहां नहीं पहुंचे थे, वरन यह भी सन्देह था कि तिलोत्तमा और जगतसिंह ने यह बात सुनी भी नहीं। कौतुहलवशत: विमला केवाड़ों की झरी से देखने लगी और अन्तस्थित भाव देख कर विस्मित हुई।

"तिलोत्तमा पलंग पर बैठी और जगतसिंह उसके समीप चुप चाप खड़े उसके मुंह की प्रभा देख रहे थे। तिलोत्तमा रोती थी और जगतसिंह आंसू पोछ रहे थे।"

विमला ने मन में कहा "जान पड़ता है यह विरह रोदन है?"